आधारशिला मॉड्यूल प्रश्नोत्तरी ( विस्तृत हल )

Adharshila Module

आधारशिला शिक्षण हस्तपुस्तिका से चुने हुए महत्वपूर्ण तथ्यों पर आधारित प्रश्नोत्तरी | डाउनलोड करें आधारशिला माड्यूल पीडीऍफ़ . Adharshila Module in Hindi

Adharshila Module in Hindi

प्रश्न ( 1 ) : आधारशिला मॉड्यूल क्या है?

उत्तर – आधारशिला माड्यूल उन सभी रोचक तरीकों एवं गतिविधियों का संग्रह है, जिनके द्वारा प्रारम्भिक स्तर पर कक्षा 1 व 2 में भाषा व गणित विषयों का शिक्षण कार्य किया जाएगा ताकि इन विषयों पर बच्चों की समझ का विकास करते हुए मजबूत आधारशिला रखी जा सके तथा भाषाई एवं गणितीय विकास के द्वारा उनके व्यक्तित्व एवं भावी जीवन को उन्नत बनाया जा सके |

प्रश्न ( 2 ) : आधारशिला मॉड्यूल के कुल कितने भाग हैं ?

उत्तरमाड्यूल के कुल 6 भाग हैं –

  1. फाउंडेशन लर्निंग की अवधारणा एवं आवश्यकता , फाउंडेशन लर्निंग शिविर 
  2. आरंभिक स्तर पर भाषा विकास , भाषा शिक्षण के लक्ष्य , भाषा सीखने-सिखाने का क्रम 
  3. आरंभिक स्तर पर गणितीय क्षमता विकास , गणित सीखने का क्रम ELPS 
  4. कक्षा 3,4 एवं 5 में भाषा , गणित एवं परिवेशीय अध्ययन – कौशल विकास के तरीके एवं गतिविधियाँ 
  5.  आंकलन 
  6. परिशिष्ट |

भाग – 1

प्रश्न ( 1 ) : लर्निंग आउटकम का क्या आशय है या लर्निंग आउटकम का क्या अर्थ है ?

उत्तरलर्निंग आउटकम का आशय कक्षा , पाठ्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों द्वारा अर्जित ज्ञान व कौशलों से है , अर्थात लर्निंग आउटकम यह इंगित करते हैं कि सीखने के अनुभव के बाद छात्रों के व्यवहार में कौन-कौन से बदलाव आयेंगे |

प्रश्न ( 2 ) : लर्निंग आउटकम के कितने प्रकार / स्तर होते हैं ?

उत्तर – लर्निंग आउटकम तीन प्रकार के होते हैं –

  1. केन्द्रिक ( फोकल ) आउटकम – यह सीखने के व्यापक क्षेत्रों और कौशलों से जुड़े हैं | इनके अन्दर कई छोटे – छोटे आउटकम सन्निहित होते हैं |
  2. नेस्टेड आउटकम – ये समान प्रकृति के कई पाठ्यचर्या लक्ष्यों को मिलाकर बनाए गए हैं |
  3. उप-आउटकम – ये सीधे कक्षा-शिक्षण प्रक्रिया में सुधार को सुनिश्चित करने की दृष्टि से विकसित किये गए हैं |

प्रश्न ( 3 ) : फाउंडेशन लर्निंग शिविर का आयोजन कैसे करेंगे, यह कितने दिनों का होता है ?

उत्तर – सत्र के प्रारम्भ में माह अप्रैल – जुलाई की मध्यावधि में कक्षा 1 से 8 तक के सभी बच्चों का आरंभिक परीक्षण किया जाएगा |

इस परीक्षण के आधार पर उन बच्चों को जिन्हें कक्षा 1 से 3 स्तर के लर्निंग आउटकम पर आधारित कक्षा शिक्षण किये जाने की आवश्यकता है के साथ 50 दिवसीय फाउंडेशन लर्निंग शिविर में शिक्षण कार्य किया जाएगा |

जैसे-जैसे ये बच्चे कक्षा 1 से 3 के लर्निंग आउटकम प्राप्त करते जायेंगे , उन्हें 4 , 5  स्तर के 50 दिवसीय ध्यानाकर्षण शिविर में स्थानांतरित किया जाता रहेगा |

प्रश्न ( 4 ) : सीखने की प्रक्रिया ERAC से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर – हमारे मस्तिष्क में सीखना इन चरणों पर आधारित होता है –

  1. Experience ( अनुभव ) – किसी रोचक और चुनौतीपूर्ण क्रिया में भाग लेकर अनुभव प्राप्त करना |
  2. Reflection ( चिंतन और विश्लेषण ) – किये गए कार्यों के विषय में सोचना , विश्लेषण करना , विविध प्रकार के सवाल परिस्थितियों के माध्यम से 
  3. Application ( अनुप्रयोग ) – स्वयं करना , प्रयोग , अभ्यास , विविध तरीकों से 
  4. Consolidation ( निष्कर्ष / समेटना ) – नतीजे निकालना , सीखना

प्रश्न ( 5 ) शिक्षण योजना का प्रारूप बनाइए |

प्रश्न ( 6 ) : आधारशिला मॉड्यूल के अनुसार सीखने के कितने चरण हैं ?

उत्तर – माड्यूल के अनुसार सीखने के चार चरण होते हैं |

  1. Experience ( अनुभव )
  2. Reflection ( चिंतन और विश्लेषण )
  3. Application ( अनुप्रयोग )
  4. Consolidation ( निष्कर्ष / समेटना )

भाग – 2

प्रश्न ( 1 ) : कब मानें कि बच्चे में सुनने और बोलने का कौशल आ गया ?

 सुनना –  जब बच्चा अपने आसपास की ध्वनियों को पहचान ले , उनमें अन्तर करने लगे , सुनी हुई बात का मतलब ( आशय ) समझने लगे और सुनी गई बात पर सटीक अनुक्रिया देने लगे तब यह मान  लेना चाहिए कि बच्चे को सुनने का कौशल विकसित हो गया है |

बोलना –  जब बच्चा अपनी बात / विचारों को सोचकर , सटीक शब्दों का चयन कर , उचित हाव-भाव , प्रवाह और व्याकरणीय शुद्धता के साथ व्यक्त करने लगता है तथा जब वह दूसरों की बातों पर बोलकर सटीक और प्रभावी अनुक्रिया देने लगता है तो यह मान लेना चाहिए कि बच्चे में बोलने का कौशल विकसित हो गया है |

प्रश्न ( 2 ) : पठन विकास की गतिविधियाँ कौन सी हैं ?

  1. किसी सरल अंश को बार-बार मौखिक रूप से बोल बोलकर पढ़ना 
  2. मौन ( स्वतन्त्र रूप से ) पठन
  3. दृश्य शब्दावली विकसित करना 
  4. किसी अखबार पत्रिका , पोस्टर , कैलेण्डर , कहानी की किताब पर नियमित रूप से चर्चा 
  5. पढ़े गए अंश पर चर्चा / बातचीत के लिए 
  6. जोड़ी में पढ़ना – सवाल-जवाब करना 
  7. अनुमान लगाने सम्बन्धी गतिविधियाँ  

प्रश्न ( 3 ) : लिखने के कौशल लिखिए |

  1. गत्यात्मक कौशल – अक्षर सही ढंग से लिखने के लिए हाथ और अंगुलियों का सही संयोजन एवं सञ्चालन किया जाना 
  2. भाषा संरचना सम्बन्धी कौशल – ध्वनियों को चिन्हों में बदलना , सही वाक्य संरचना ,विराम चिन्हों का उचित प्रयोग करना 
  3. संज्ञानात्मक कौशल –  क्या लिखना है इस बारे में सोचने , बात को तार्किक ढंग से लिखने और एक सूत्र में पिरोने का कौशल निहित है |

भाग – 3

प्रश्न ( 1 ) : गणित के अध्ययन से हमारे अन्दर किन कौशलों का विकास होता है ?

उत्तर – गणित द्वारा हमारे अन्दर कई प्रकार के कौशलों का विकास होता है | जैसे –

  1. क्रमबद्धता 
  2. नियमितता
  3. तर्क और चिंतन 
  4. निर्णय लेना 
  5. विश्लेषण और संश्लेषण 
  6.  निष्कर्ष निकालना 
  7. तथ्य प्राप्त करना और प्रस्तुत करना 

प्रश्न ( 2 ) : गणित सीखने – सिखाने का क्रम क्या है ? यह किस प्रकार कार्य करता है ?

 उत्तर – गणित सीखने-सिखाने का क्रम ELPS पर आधारित है |

Experience ( अनुभव ) – ठोस वस्तुओं के साथ अनुभव , विविध प्रकार की वस्तुओं के साथ बार-बार अभ्यास 

Language ( भाषा ) – वस्तुओं के साथ क्रियाएं करते हुए दैनिक जीवन के विविध सन्दर्भों से जुडी भाषा का प्रयोग 

Picture ( चित्र ) – चित्रों के साथ कार्य , वार्तालाप , अलग -अलग प्रकार के चित्रों के साथ विविध तरीके से तुलना करना 

Symbol ( प्रतीक / संकेत ) – मात्रात्मक और क्रमागत अवधारणाओं के साथ प्रतीकों का प्रयोग 

प्रश्न ( 3 ) : आधारशिला के अनुसार शिक्षण कार्य करने पर गणित की कक्षाएं कैसी होंगी ?

 उत्तर – गणित की कक्षाएं निम्न प्रकार की होंगी –

  1. गणित सीखने-सिखाने के क्रम का प्रयोग हो रहा होगा |
  2. बच्चे छोटे-बड़े समूह में कार्य कर रहे होंगे |
  3. सीखने – सिखाने की प्रक्रिया में परिवेशीय वस्तुओं का प्रयोग हो रहा होगा |
  4. बच्चे एक-दूसरे से एवं शिक्षक के साथ सम्बोधों पर चर्चा कर निष्कर्ष निकाल रहे होंगे |
  5. बच्चों को अभ्यास पुस्तिका पर कार्य के साथ श्यामपट्ट पर भी सवाल हल करने का मौका मिल रहा होगा |
  6. बच्चे एक दूसरे की अभ्यास पुस्तिकाओं में किये गए कार्यों की जांच व सुधार कर रहे होंगे |

भाग – 4

प्रश्न ( 1 ) : परिवेशीय अध्ययन शिक्षण से बच्चों में कौन से कौशल विकसित होते हैं ?

उत्तर – बच्चे अधिक सामाजिक बनते हैं | उनकी सोच और व्यवहार में स्पष्टता आती है | वे आपसी रिश्तों में अधिक संवेदनशील बनते हैं | उनमें निम्न कौशलों का विकास होता है –

  1. व्यवस्था और क्रमबद्धता आती है |
  2. किसी मुद्दे पर अधिक तर्कपूर्ण ढंग से चर्चा कर सकते हैं |
  3. उनमें समूहीकरण , वर्गीकरण , तुलना करना , तार्किकता , यंत्रों का प्रयोग , आंकड़ों को संकलित करना , विश्लेषण करना , मानचित्र बनाना और प्रदर्शित करने के कौशल |

भाग – 5

प्रश्न ( 1 ) : गणित में मूल्यांकन क्यों आवश्यक है ?

उत्तर -गणित में मूल्यांकन की भूमिका निम्नांकित रूपों में देखी जा सकती है –

  1. शिक्षक द्वारा अपनी शिक्षण तकनीक की समीक्षा और सुधार के लिए 
  2. बच्चों के संप्राप्ति स्तर के मूल्यांकन के साथ शिक्षक के खुद के मूल्यांकन के लिए 
  3. सीखी गई दक्षताओं / कौशलों की जानकारी लेना 
  4. आगे की रणनीति और योजना निर्माण के लिए 
  5. बच्चों का वर्गीकरण संप्राप्ति के आधार पर करने के लिए 
  6. कठिनाई जानने और उसपर कार्य करने के लिए 

भाग – 6

प्रश्न ( 1 ) : किसी संस्था के विकास के लिए किन पहलुओं में सार्थक बदलाव जरूरी है ?

उत्तर – किसी भी शैक्षिक संस्था या स्कूल में तीन पहलू सम्मिलित होते हैं –

1. सम्बन्ध ( Relationship ) -बच्चों के आपसी सम्बन्ध , बच्चों और शिक्षकों के बीच , शिक्षकों के बीच , बच्चे , शिक्षक और प्रधानाध्यापक के बीच , स्कूल और समुदाय , अभिभावकों के बीच , स्कूल और सुपरवाइजरी संस्थाओं और समूहों के बीच बेहतर सम्बन्ध होना जरूरी है |

2. प्रक्रिया ( Process ) – सीखने की ऐसी प्रक्रियाएं जिनमें बच्चों को स्वतः करके सीखने के अवसर हों | शिक्षक की भूमिका ऐसे माहौल बनाने की हो जहाँ बच्चे खुद के महत्तम प्रयासों से अपना सीखना सुनिश्चित करें | 

3. परिणाम ( Outcome ) – हर विषय के वांछित लर्निंग आउटकम तक चाही गई प्रक्रिया से पहुँचना | केवल याद कर लेना या रट लेना नहीं है बल्कि अवधारणाओं की ऐसी समझ जिनका उपयोग जीवन के विविध पहलुओं में बच्चे कर सकें | 

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