धरातल के रूप बदलने वाले कारक : बाह्य कारक

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धरातल के रूप बदलने वाले कारक : बाह्य कारक

अभ्यास प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दीजिए-

(क) अपक्षय कितने प्रकार का होता है। जैविक अपक्षय से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर : अपक्षय मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं

  1. भौतिक अपक्षय
  2. रासायनिक अपक्षय
  3. जैविक अपक्षय – पृथ्वी पर रहने वाले जीव जंतु तथा मानव की विभिन्न प्रक्रियाओं द्वारा भी चट्टानें कमजोर होती हैं,जैसे जंतुओं द्वारा बिल बनाना तथा मानव द्वारा खाने खोदना सड़के बनाना सुरंग बनाना आदि| इसी प्रकार चट्टानों की दरारों में जब हवा द्वारा उड़कर कर बीच गिर जाते हैं तब वहां पौधा उगने लगता है और धीरे-धीरे वृक्ष का रूप लेने पर उसकी जड़े चट्टानों को कमजोर करती हैं | इसे जैविक अपक्षय कहते हैं |

(ख) जल प्रपात कैसे बनते हैं ?

उत्तर : जब नदी का जल ऊंचाई से खड़े ढाल के सहारे अधिक वेग से नीचे गिरता है तो जलप्रपात बनता है |

(ग) बालुका स्तूप क्या है ? इसका निर्माण कैसे होता है ?

उत्तर : मरुस्थलीय प्रदेशों में जब पवन के मार्ग में कोई बाधा होती है तब पवन का वेग पवन के साथ उड़ने वाले पदार्थ धरातल पर गिरकर बालू के टीले का निर्माण करते हैं | इन्हें बालूका स्पूत कहते हैं |

(घ) डेल्टा का निर्माण कैसे होता है ?

उत्तर : नदी के सागर में गिरने के पहले उसके बहने की गति अधिक धीमी पड़ जाती है इस कारण नदी के मलबे का निक्षेपण होने लगता है जिससे डेल्टा का निर्माण होता है |

निम्नलिखित में अन्तर स्पष्ट कीजिए-

(क) अपक्षय और अपरदन

उत्तर :अपक्षय – चट्टानों की अपने स्थान पर टूटने फूटने की क्रिया को अपक्षय कहते हैं | इसमें टूटे हुए टुकड़ों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर नहीं ले जाया जाता है | अक्षय के कार्य में ताप वर्षा का जल पहला वनस्पति जीव जंतु तथा मानव का हाथ रहता है | यह मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है -भौतिक रासायनिक एवं जैविक |

अपरदन – जब प्रवाहित जल पवन समुद्री लहरें हिमानी आदि शक्तियां चट्टानों में तोड़फोड़ करती हैं तथा परिवहन द्वारा उन्हें दूसरी जगह ले जाती हैं तो इस क्रिया को अपरदन कहते हैं | इसमें कटाव और बहाव की प्रक्रिया को शामिल किया जाता है |

(ख) Uआकार की घाटी और Vआकार की घाटी

उत्तर : U आकार की घाटी और V आकार की घाटी में अंतर – पहाड़ी भाग में हिमानी सपाट चौड़ी खड़े ढाल वाली घाटियों का निर्माण करती हैं इनका आकार अंग्रेजी के U आकार की तरह होता है | पहले से बने Vआकार की घाटी को हिमानी Uआकार की घाटी में बदल देती है|

(ग) भौतिक एवं रासायनिक अपक्षय

उत्तर : भौतिक अपक्षय -चट्टाने दिन में सूर्य की गर्मी से गर्म होकर फैल जाती है और रात में तापमान कम होने के कारण सिकुड़ जाती है इससे चट्टाने धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगती हैं और टूट जाती हैं | इससे चट्टाने छोटे-छोटे कणों में टूट कर बिखरने लगती हैं | हवा भी अपने प्रभाव से चट्टानों को तोड़ फोड़ देती हैं | चट्टानों के इस प्रकार टूटने को भौतिक अपक्षय कहते हैं |

रासायनिक अपक्षय -चट्टानों में अनेक प्रकार के खनिजों का सा मिश्रण पाया जाता है पानी के संपर्क से इन तत्वों में परिवर्तन होता रहता है | इस परिवर्तन से सोईल के बंधन ढीले पड़ जाते हैं और रासायनिक प्रक्रिया से चट्टानें टूटने लगती हैं इस प्रक्रिया को रासायनिक अपक्षय कहते हैं जैसे वर्षा ऋतु में लोहे में जंग लग जाता है |

निम्नलिखित के सही जोड़े बनाइए-

  • नदी – डेल्टा
  • हिमानी – U आकार की घाटी
  • समुद्री लहरें – भृगु
  • भूमिगत जल – हेलेक्टाइट
  • पवन छत्रक – शिला

निम्नलिखित में से सही विकल्प पर ✔ का निशान लगाइए-

(क) पवन द्वारा निर्मित स्थलाकृति है।

  • बालुका स्तूप ✔
  • स्टेलेग्माइट
  • डेल्टा
  • विसर्प

(ख) चट्टानों के अपने स्थान पर दूटने की क्रियां कहलाती है।

  • विघटन
  • अपरदन
  • अपक्षय ✔
  • इनमें से कोई नहीं .

(ग) भूमिगत जल द्वारा निर्मित आकृति है।

  • स्टेलेक्टाइट ✔
  • Uआकार की घाटी
  • भू स्तम्भ
  • V आकार की घाटी

(घ). पृथ्वी की आन्तरिक शक्ति से होता है-

  • अपक्षय
  • अपरदन
  • अनाच्छादन
  • भूकम्प ✔

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