झाँसी की रानी की समाधि पर (कविता) : कक्षा 5 हिन्दी पाठ 17

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झाँसी की रानी की समाधि पर

(1)

इस समाधि में छिपी हुई है,
एक राख की ढेरी।
जलकर जिसने स्वतंत्रता की,
दिव्य आरती फेरी।

यह समाधि यह लघु समाधि है,
झाँसी की रानी की।
अन्तिम लीला स्थली यही है,
लक्ष्मी मरदानी की।।

भावार्थ: कवयित्री झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की समाधि के बारे में बताते हुए कहती हैं कि यह जो समाधि है इसमें उन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की चिताओं की राख का ढेर है, जिन्होंने 1857 के स्वतंत्रता आन्दोलन का बिगुल बजाया था और इस छोटी सी समाधि झांसी की रानी की है | रानी लक्ष्मीबाई की अंतिम लीला स्थली यही है |

(2)

यहीं कहीं पर बिखर गयी वह,
भग्न विजय माला-सी।
उसके फूल यहीं संचित हैं,
है यह स्मृति शाला-सी।।

सहे वार पर वार अंत तक,
लड़ी वीर बालानसी।
आहुति-सी गिर चढ़ी चिता पर,
चमक उठी ज्वाला-सी ||

भावार्थ : रानी लक्ष्मीबाई लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त हुई, जैसे कोई माला टूटकर बिखर गई हो। उनकी हड्डियों के अवशेष (फूल) यहीं पर इकट्ठे हैं, मानो यह समाधि उनका स्मृति स्थल हो। उस वीरांगना ने अंग्रेजों का डटकर मुकाबला किया। उसने स्वाधीनता के महायज्ञ में अपनी आहुति दे दी। चिता की ज्वाला से उनका व्यक्तित्व और भी चमकीला बन गया।

(3)

बढ़ जाता है मान वीर का,
रण में बलि होने से।
मूल्यवत्ती होती सोने की,
भस्म यथा सोने से।।

रानी से भी अधिक हमें अब,
यह समाधि है प्यारी।
यहाँ निहित है स्वतंत्रता की,
आशा की चिनगारी।।

भावार्थ : जिस प्रकार स्वर्ण-भस्म, सोने से भी मूल्यवान होती है, उसी प्रकार युद्ध में वीरगति पाने से वीर योद्धा का मान-सम्मान बढ़ जाता है। हमें अब रानी लक्ष्मी की समाधि, उनसे भी अधिक प्रिय लगती है। क्योंकि इसमें स्वाधीनता की आशा की चिंगारी निहित है।

(4)

इससे भी सुंदर समाधियाँ,
हम जग में हैं पाते।
उनकी गाथा पर निशीथ में,
क्षुद्र॒ जंतु ही गाते ||

पर कवियों की अमर गिरा में,
इसकी अमिट कहानी।
स्नेह और श्रद्धा से गाती,
है वीरों की बानी।।

भावार्थ : रानी लक्ष्मीबाई की समाधि से भी सुन्दर समाधियाँ पूरे विश्व में मौजूद हैं परन्तु उन समाधियों की कहानी आधी रात में छोटे-छोटे जीव-जन्तु ही सुनते-सुनाते हैं। लेकिन रानी लक्ष्मीबाई की समाधि की अमर कहानी कवियों की लेखनी में अमिट हो गई है। वीरों की शौर्य-गाथाएँ कवि लोग बड़े स्नेह और श्रद्धा के साथ गाते हैं।

(5)

बुंदेले हरबोलों के मुख,
हमने सुनी कहानी ।
खूब लड़ी मरदानी वह थी,
झाँसी वाली रानी।।

भावार्थ : कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान कहती हैं कि हमने बुन्देलखण्ड के लोगों से रानी की वीरता की कहानियाँ सुनी हैं। इस वीरांगना ने अँगरेजों का डटकर सामना किया था, जिसके कारण वह झाँसी की रानी के नाम से प्रसिद्ध हुई।

Exercise ( अभ्यास )

प्रश्न-1. बोध प्रश्न : उत्तर लिखिए –

(क) रानी की समाधि किन-किन बातों की याद दिलाती है ?

उत्तर- रानी की समाधि 1857 के स्वतंत्रता आन्दोलन में वीर सेनानियों के त्याग की याद दिलाती है |

(ख) ‘रानी की समाधि में स्वतंत्रता की आशा की चिनगारी छिपी है’ – ऐसा क्‍यों कहा गया है ?

उत्तर- 1857 का स्वतंत्रता संग्रम्म ऐसी चिंगारी थी, जिसने पूरे भारत में स्वतंत्रता आन्दोलन को नयी दिशा प्रदान की | कविता में ऐसा इसीलिए कहा गया है |

(ग) रानी की समाधि तथा अन्य समाधियों में क्या अंतर है ?

उत्तर- रानी की समाधि देखकर जो स्वाभिमान एवं देशप्रेम की भावना लोगों में जागृत होती है वैसा अन्य समाधियों को देखकर नहीं आता है | आज भी लोग उस वीरांगना की वीरगाथा लोग बड़े आदरपूर्वक गाते हैं |

(घ) युद्ध भूमि में बलिदान के बाद वीर का मान बढ़ जाता है। इस कथन के समर्थन में कवि ने क्‍या उदाहरण दिया है ?

उत्तर- कवयित्री ने बतलाया है कि जिस प्रकार सोने की राख का मूल्य सोने से अधिक होता है, उसी प्रकार युद्ध में जो वीरगति को प्राप्त होता है, उसका भी मान बढ़ जाता है |

प्रश्न-2. नीचे लिखी पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए –

(क) पर कवियों की अमर गिरा में,
इसकी अमिट कहानी।
स्नेह और श्रद्धा से गाती,
है वीरों की बानी।।

भावार्थ – लेकिन रानी लक्ष्मीबाई की समाधि की अमर कहानी कवियों की लेखनी में अमिट हो गई है। वीरों की शौर्य-गाथाएँ कवि लोग बड़े स्नेह और श्रद्धा के साथ गाते हैं।

(ख) बढ़ जाता है मान वीर का,
रण में बलि होने से।
मूल्यवती होती सोने की,
भस्म यथा सोने से ।।

भावार्थ- जिस प्रकार स्वर्ण-भस्म, सोने से भी मूल्यवान होती है, उसी प्रकार युद्ध में वीरगति पाने से वीर योद्धा का मान-सम्मान बढ़ जाता है।

प्रश्न-3. -सोच- विचार : बताइए-
झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई का नाम इतिहास में अमर क्‍यों है ?

उत्तर- झांसी की रानी लक्ष्मी बाई ने वीरता का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया जिसे देखकर देश भर में क्रान्ति की ज्वाला भड़क उठी | इस प्रकार उनका नाम इतिहास में अमर हो गया |

प्रश्न-4. भाषा के रंग –

‘क’ वर्ग में दिए गए शब्दों के समानार्थी शब्द ‘ख’ वर्ग से मिलान कीजिए –

(क)(ख)
स्वतन्त्रस्वाधीन
रणयुद्ध
गाथाकहानी
संचितएकत्र
गिरावाणी
भस्मराख

प्रश्न-5. तुम्हारी कलम से –
अपने आस-पास की किसी महिला के द्वारा किए गए बहादुरी के कार्यों को अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर- स्वयं लिखें |

प्रश्न-6. अब करने की बारी –

(क) सुभद्राकुमारी चौहान ने झाँसी की रानी पर ही एक और कविता लिखी है। उसे पुस्तकालय से खोजकर पढ़िए।
(ख) कविता की आठ पंक्तियाँ याद कर कक्षा में हाव-भाव के साथ सुनाइए।
(ग) आजादी की लड़ाई में अपने प्राणों का बलिदान देने वाले कुछ अन्य वीरों के नामों की सूची बनाइए ।

उत्तर- स्वयं लिखें |

प्रश्न-7. मेरे दो प्रश्न : कविता के आधार पर दो सवाल बनाइए –

  1. लक्ष्मी बाई कहाँ की रानी थी ?
  2. किसकी समाधि अन्य समाधियों से भिन्न है ?

प्रश्न-8. इस कविता से –
(क) मैंने; सीखा – स्वयं लिखें |
(ख) मैं करूँगी/ करूँगा -स्वयं लिखें |

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